बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने गुरुवार को विभिन्न पार्टियों पर अपने संकीर्ण स्वार्थों की पूर्ति के लिए कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) आंदोलन का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “यह सड़कों से लेकर संसद तक टकराव और हिंसा को बढ़ावा दे रहा है। सरकार और आंदोलनकारियों को संयुक्त रूप से जितनी जल्दी हो सके एक शांतिपूर्ण और सामंजस्यपूर्ण समाधान पर पहुंचना चाहिए।”

गुरुवार को एक्स पर एक पोस्ट में बसपा प्रमुख ने कहा कि चाहे वह अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित हेराफेरी का मामला हो या अखिल भारतीय और राज्य स्तरीय परीक्षाओं में पेपर लीक का मामला, ये सभी मूल रूप से हर स्तर पर पनप रहे भ्रष्टाचार का परिणाम हैं।
उन्होंने कहा, विशेष रूप से मेडिकल प्रवेश के लिए एनईईटी जैसी विशेष परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं के परिणामों को लेकर नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी के चल रहे अनिश्चितकालीन आंदोलन ने जबरदस्त उथल-पुथल मचा दी है, क्योंकि छात्रों, विशेषकर लड़कियों और उनके परिवारों का जीवन अनिश्चितता से गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है।
अब, इस मुद्दे का राजनीतिकरण होने के साथ, यह सरकार के साथ सीधे टकराव में बदल गया है, एक गंभीर स्थिति जिससे देश को बाहर निकाला जाना चाहिए, क्योंकि यह न केवल दिल्ली में बल्कि विभिन्न राज्यों में भी रोजमर्रा की जिंदगी को बाधित कर रहा है, उन्होंने कहा।
उन्होंने कहा कि यह संवैधानिक नैतिकता से भी जुड़ा मामला है, जिसका अभाव देश को लगातार दीमक की तरह खा रहा है, जबकि संविधान निर्माता बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर ने सुशासन के लिए इस पर विशेष ध्यान देने की जरूरत पर विशेष जोर दिया था।
उन्होंने कहा, “मेरा कहना यह है कि देश और लोगों के हितों से जुड़ी मौजूदा गंभीर परिस्थितियों के सामंजस्यपूर्ण समाधान के लिए, बेहतर होगा कि सरकार और माननीय अदालतें जैसी संवैधानिक संस्थाएं अपनी भूमिका निभाने की पहल करें।”

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