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समेसी में मेराडोर बिल्डर्स के ग्रीन सिटी प्रोजेक्ट पर सवाल, अजीत सिंह बोले—जिला पंचायत से अप्रूवल अभी नहीं मिला

समेसी में मेराडोर बिल्डर्स के ग्रीन सिटी प्रोजेक्ट पर सवाल, अजीत सिंह बोले—जिला पंचायत से अप्रूवल अभी नहीं मिला

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लखनऊ | विशेष संवाददाता, NEWS NOW लखनऊ के मोहनलालगंज क्षेत्र के ग्राम समेसी में पावर हाउस के पास प्रस्तावित मेराडोर बिल्डर्स के कथित ‘ग्रीन सिटी’ प्रोजेक्ट को लेकर जमीन के दस्तावेजों, निर्माण कार्य और आवश्यक अनुमतियों की स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं। परियोजना को लेकर जमीन की बिक्री, कथित मनी बैक स्कीम और जिला पंचायत की मंजूरी जैसे कई बिंदुओं पर स्पष्टता की मांग की जा रही है। इस बीच, मेराडोर बिल्डर्स के सीएमडी बताए जा रहे अजीत सिंह का कहना है कि प्रोजेक्ट की फाइल जिला पंचायत के अप्रूवल के लिए लगाई गई है, लेकिन अभी तक मंजूरी नहीं मिली है।

अजीत सिंह के इस बयान के बाद परियोजना की मौजूदा स्थिति को लेकर एक अहम सवाल खड़ा होता है—जब जिला पंचायत की स्वीकृति अभी लंबित है, तो क्या साइट पर किसी तरह का विकास कार्य किया जा रहा है? यदि काम जारी है, तो उसकी प्रकृति क्या है और उसके लिए कौन-कौन सी अनुमतियां प्राप्त हैं? इन सवालों का जवाब मौके की जांच और संबंधित विभागों के आधिकारिक अभिलेखों से ही स्पष्ट हो सकता है।

जिला पंचायत की मंजूरी लंबित, साइट पर विकास कार्य को लेकर सवाल

अजीत सिंह के अनुसार, ग्रीन सिटी प्रोजेक्ट की फाइल जिला पंचायत के अनुमोदन के लिए जमा है, लेकिन अभी तक अप्रूवल नहीं मिला है। इस बयान के आधार पर परियोजना की वर्तमान अनुमति स्थिति की पुष्टि करना आवश्यक हो जाता है।

यदि जिला पंचायत की मंजूरी लंबित है, तो संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट करना चाहिए कि परियोजना स्थल पर इस समय कौन-सी गतिविधियां चल रही हैं। क्या वहां केवल जमीन की सफाई या अन्य प्रारंभिक कार्य हो रहे हैं, अथवा सड़क, प्लॉटिंग, निर्माण या अन्य प्रकार का विकास किया जा रहा है? इन गतिविधियों पर कौन-से नियम लागू होते हैं और क्या उनके लिए अलग से किसी अनुमति की आवश्यकता है—इसकी जानकारी भी सार्वजनिक होनी चाहिए।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि जिला पंचायत की मंजूरी लंबित होने का अर्थ अपने आप यह साबित नहीं करता कि साइट पर किया जा रहा प्रत्येक कार्य अवैध है। इसकी स्थिति परियोजना के स्वरूप, लागू नियमों और प्राप्त अन्य अनुमतियों की जांच के बाद ही निर्धारित की जा सकती है। इसलिए मौके का निरीक्षण और दस्तावेजों का सत्यापन महत्वपूर्ण है।

जमीन के वास्तविक रकबे और बिक्री के दस्तावेजों की जांच की मांग

परियोजना को लेकर यह आरोप भी लगाया जा रहा है कि जमीन के दस्तावेजों में दर्ज क्षेत्रफल और कथित तौर पर बेची गई जमीन के रकबे में अंतर हो सकता है। फिलहाल इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में राजस्व अभिलेखों, खतौनी, संबंधित भूमि के स्वामित्व दस्तावेजों, सीमांकन रिपोर्ट और बिक्री विलेखों का मिलान किया जाना आवश्यक है।

जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि परियोजना के लिए कुल कितनी जमीन उपलब्ध है, उसका स्वामित्व किसके नाम दर्ज है, कितने क्षेत्रफल की बिक्री की गई है और बिक्री के दस्तावेज वास्तविक भूमि अभिलेखों से मेल खाते हैं या नहीं। यदि दस्तावेजों और वास्तविक स्थिति में कोई अंतर सामने आता है, तो संबंधित विभाग नियमानुसार कार्रवाई पर विचार कर सकते हैं।

RERA पंजीकरण और स्वीकृत नक्शे पर भी स्पष्टता जरूरी

ग्रीन सिटी प्रोजेक्ट के संबंध में रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण यानी RERA के पंजीकरण, स्वीकृत लेआउट और निर्माण संबंधी अनुमतियों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

इस मामले में सबसे पहले परियोजना की कानूनी श्रेणी और लागू नियमों की पुष्टि जरूरी है। हर प्रकार की जमीन की खरीद-बिक्री या विकास गतिविधि पर RERA के नियम एक जैसे लागू नहीं होते। इसलिए संबंधित विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि परियोजना के स्वरूप के अनुसार RERA पंजीकरण अनिवार्य है या नहीं। यदि पंजीकरण आवश्यक है, तो उसका नंबर और स्थिति सार्वजनिक की जानी चाहिए।

इसी तरह, स्वीकृत नक्शे, लेआउट, भूमि उपयोग और जिला पंचायत से संबंधित अनुमतियों की भी जांच होनी चाहिए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि परियोजना को किन गतिविधियों की अनुमति मिली है और कौन-सी मंजूरियां अभी लंबित हैं।

कथित मनी बैक स्कीम के नियम और शर्तें क्या हैं?

परियोजना से जुड़े मामले में निधि के नाम पर कथित मनी बैक स्कीम संचालित किए जाने का आरोप भी सामने आया है। हालांकि, इस योजना की वास्तविक प्रकृति, संचालन करने वाली इकाई, निवेश या भुगतान की शर्तों और ग्राहकों के साथ हुए समझौतों की स्वतंत्र पुष्टि अभी आवश्यक है।

जांच के दौरान यह देखा जाना चाहिए कि योजना के अंतर्गत लोगों से किस आधार पर धन लिया गया, उन्हें क्या लिखित शर्तें दी गईं और भुगतान या धनवापसी का कोई आश्वासन दिया गया था या नहीं। यदि किसी वित्तीय योजना के संचालन में संबंधित कानूनों के उल्लंघन की शिकायत मिलती है, तो सक्षम विभाग तथ्यों के आधार पर उसकी जांच कर सकते हैं।

अजीत सिंह के बयान के बाद इन सवालों पर जवाब जरूरी

अजीत सिंह का कहना है कि प्रोजेक्ट की फाइल जिला पंचायत के अनुमोदन के लिए जमा है और मंजूरी अभी नहीं मिली है। इस बयान को ध्यान में रखते हुए परियोजना की वास्तविक स्थिति जानने के लिए कुछ बिंदुओं पर आधिकारिक स्पष्टीकरण जरूरी है।

पहला, जिला पंचायत में फाइल कब जमा की गई और उसका वर्तमान स्टेटस क्या है? दूसरा, क्या विभाग की ओर से कोई आपत्ति या अतिरिक्त दस्तावेज मांगे गए हैं? तीसरा, साइट पर वर्तमान में किस प्रकार का काम हो रहा है और उसके लिए कौन-सी अनुमतियां प्राप्त हैं? चौथा, परियोजना के कुल क्षेत्रफल, भूमि स्वामित्व और बिक्री से संबंधित दस्तावेजों की स्थिति क्या है? पांचवां, परियोजना पर RERA के नियम लागू होते हैं या नहीं और यदि होते हैं, तो पंजीकरण की स्थिति क्या है?

इन सवालों का जवाब संबंधित विभागों के अभिलेखों और कंपनी के दस्तावेजों से सामने आना चाहिए। केवल आरोपों या किसी एक बयान के आधार पर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

संबंधित विभागों से जांच और स्थिति स्पष्ट करने की मांग

मामले में मोहनलालगंज क्षेत्र के संबंधित अधिकारियों, जिला पंचायत और जरूरत के अनुसार राजस्व विभाग तथा RERA से जुड़े सक्षम प्राधिकरणों को उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। यदि आवश्यक हो, तो स्थल निरीक्षण कर वास्तविक गतिविधियों और स्वीकृतियों का मिलान किया जा सकता है।

फिलहाल, ग्रीन सिटी परियोजना को लेकर उठाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। अजीत सिंह का उपलब्ध कराया गया पक्ष यह है कि जिला पंचायत की मंजूरी अभी नहीं मिली है। अब परियोजना की अनुमति स्थिति, साइट पर हो रही गतिविधियों और जमीन के दस्तावेजों की वास्तविक स्थिति संबंधित विभागों की जांच से स्पष्ट हो सकेगी।

NEWS NOW का पक्ष: जमीन खरीदने या निवेश करने वाले लोगों के हित में परियोजनाओं की वैधानिक स्थिति, स्वीकृतियों और दस्तावेजों की पारदर्शिता महत्वपूर्ण है। इस मामले में मेराडोर बिल्डर्स और संबंधित विभागों का विस्तृत आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाना चाहिए।

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