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मोहनलालगंज में ABR Homes के प्रोजेक्टों पर उठे सवाल, नक्शे और जमीन की बिक्री की जांच की मांग

मोहनलालगंज में ABR Homes के प्रोजेक्टों पर उठे सवाल, नक्शे और जमीन की बिक्री की जांच की मांग

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मस्तीपुर टिकरा और रायभान खेड़ा में आवासीय परियोजनाओं को लेकर सवाल; जिला पंचायत की स्वीकृति, भूमि अभिलेख और RERA पंजीकरण की स्थिति स्पष्ट करने की मांग

 

विशेष संवाददाता | लखनऊ।

लखनऊ के मोहनलालगंज तहसील क्षेत्र में ABR Homes इंडिया लिमिटेड की आवासीय परियोजनाओं को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं। मस्तीपुर टिकरा और आसपास के क्षेत्रों में स्थित बताए जा रहे कंपनी के हमारा होम सिटी और श्री घरौंदा प्रोजेक्टों में स्वीकृत नक्शे, भूमि की बिक्री, रजिस्ट्री और आवश्यक विभागीय अनुमोदनों की स्थिति स्पष्ट करने की मांग सामने आई है। मामले में संबंधित विभागों के अभिलेखों की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, श्री घरौंदा परियोजना का नक्शा जिला पंचायत से स्वीकृत होने की बात कही जा रही है। हालांकि, सूत्रों के हवाले से यह आशंका जताई गई है कि स्वीकृत नक्शे में दर्ज भूमि के मुकाबले अधिक क्षेत्रफल में जमीन की बिक्री या रजिस्ट्री हुई हो सकती है। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में स्वीकृत मानचित्र, गाटा संख्या, कुल क्षेत्रफल और पंजीकृत बैनामों का मिलान कराया जाना महत्वपूर्ण है।

हमारा होम सिटी में लगभग 10 बीघा जमीन की बिक्री पर सवाल

मोहनलालगंज तहसील क्षेत्र में टिकरा गांव के पास स्थित बताए जा रहे हमारा होम सिटी प्रोजेक्ट में लगभग 10 बीघा जमीन की बिक्री को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। उपलब्ध जानकारी में परियोजना के लिए आवश्यक अनुमोदनों और लागू मानकों के अनुपालन की स्थिति स्पष्ट नहीं है।

यह पता लगाने की जरूरत है कि संबंधित भूमि का उपयोग किस श्रेणी में दर्ज है, परियोजना के लिए कौन-कौन सी स्वीकृतियां ली गई हैं और बिक्री के लिए प्रस्तुत किए गए दस्तावेज संबंधित अभिलेखों से मेल खाते हैं या नहीं। केवल आरोपों के आधार पर किसी अनियमितता की पुष्टि नहीं की जा सकती। इसके लिए राजस्व अभिलेखों, स्वीकृत मानचित्र और रजिस्ट्री दस्तावेजों की जांच आवश्यक होगी।

रायभान खेड़ा में जमीन की बिक्री और रजिस्ट्री की भी जांच की मांग

रायभान खेड़ा क्षेत्र में जमीन की बिक्री और रजिस्ट्री से जुड़े मामलों की जांच किए जाने की जरूरत भी बताई जा रही है। हालांकि, इस क्षेत्र में संबंधित परियोजना की सीमाओं, भूमि के स्वामित्व, स्वीकृतियों और बिक्री की स्थिति को लेकर कोई स्वतंत्र रूप से सत्यापित विवरण उपलब्ध नहीं है।

प्रशासनिक जांच के दौरान यह स्पष्ट किया जा सकता है कि संबंधित भूमि पर आवासीय परियोजना विकसित करने की अनुमति है या नहीं, निर्माण अथवा भूखंडों के विकास के लिए आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त की गई हैं या नहीं और बिक्री से जुड़े दस्तावेज नियमों के अनुरूप हैं या नहीं।

कंपनी से जुड़े लोगों और कार्यालय को लेकर भी जानकारी की पुष्टि जरूरी

उपलब्ध जानकारी में ABR Homes इंडिया लिमिटेड से जुड़े मोहम्मद अबरार, मोहम्मद जुनैद सिद्दीकी और मोहम्मद बारीक अंसारी के नाम सामने आए हैं। इसके अलावा, सूत्रों के हवाले से मनोज चौहान का नाम भी कंपनी के साथ साझेदारी के संबंध में बताया जा रहा है। कंपनी का संचालन वृंदावन स्थित कार्यालय से होने का दावा भी किया गया है।

हालांकि, इन व्यक्तियों की आधिकारिक भूमिकाओं, कंपनी में उनकी हिस्सेदारी और परियोजनाओं के संचालन से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए कंपनी के आधिकारिक रिकॉर्ड, निदेशकों अथवा अधिकृत प्रतिनिधियों के विवरण और संबंधित भूमि परियोजनाओं से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर ही स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।

प्रशासन और संबंधित विभागों से किन बिंदुओं पर जांच अपेक्षित?

मामले में जिला प्रशासन, जिला पंचायत, लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA), राजस्व विभाग और उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (UP RERA) के स्तर पर संबंधित अधिकार क्षेत्र के अनुसार अभिलेखों की जांच उपयोगी हो सकती है।

जांच के प्रमुख बिंदु:

  1. स्वीकृत नक्शे की स्थिति: क्या श्री घरौंदा परियोजना का मानचित्र सक्षम प्राधिकारी से स्वीकृत है? यदि हां, तो स्वीकृति किन गाटा संख्याओं और कितने क्षेत्रफल के लिए दी गई है?
  2. भूमि की बिक्री और रजिस्ट्री: क्या परियोजना में बेची गई भूमि और पंजीकृत बैनामों का क्षेत्रफल स्वीकृत मानचित्र तथा भूमि अभिलेखों से मेल खाता है?
  3. RERA पंजीकरण: क्या संबंधित परियोजना के स्वरूप और लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार RERA पंजीकरण अनिवार्य है? यदि हां, तो पंजीकरण कराया गया है या नहीं? इसकी पुष्टि संबंधित परियोजना के आधिकारिक रिकॉर्ड से की जानी चाहिए।
  4. भूमि उपयोग और विकास संबंधी अनुमतियां: क्या संबंधित भूमि पर आवासीय विकास के लिए आवश्यक भू-उपयोग परिवर्तन, लेआउट स्वीकृति और अन्य अनुमोदन प्राप्त किए गए हैं?
  5. राजस्व अभिलेख और स्वामित्व: संबंधित गाटा संख्याओं की खतौनी, स्वामित्व, भूमि की सीमाओं और रजिस्ट्री दस्तावेजों में दर्ज विवरण का मिलान किया गया है या नहीं?
  6. नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई: यदि सक्षम विभाग की जांच में किसी नियम के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित कानूनों के अनुसार क्या कार्रवाई की जाएगी और जमीन खरीदने वाले लोगों के हितों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी?

दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति

ABR Homes इंडिया लिमिटेड के हमारा होम सिटी और श्री घरौंदा प्रोजेक्टों को लेकर सामने आए सवालों पर फिलहाल किसी विभागीय जांच के निष्कर्ष या आधिकारिक कार्रवाई की पुष्टि उपलब्ध नहीं है। कंपनी का पक्ष भी इस खबर के लिए उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है।

ऐसे में मामले की निष्पक्ष जांच और संबंधित दस्तावेजों की उपलब्धता महत्वपूर्ण है। सक्षम प्राधिकारी यदि स्वीकृत मानचित्र, भूमि अभिलेख, रजिस्ट्री और आवश्यक अनुमोदनों की जांच कर स्थिति स्पष्ट करते हैं, तो इससे परियोजनाओं की वैधानिक स्थिति सामने आ सकेगी।

यदि जांच में अनियमितता पाई जाती है, तो नियमानुसार कार्रवाई के साथ प्रभावित भूखंड खरीदारों के हितों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण होगी। वहीं, यदि आरोपों की पुष्टि नहीं होती है, तो आधिकारिक अभिलेखों के आधार पर स्थिति स्पष्ट होने से अनावश्यक भ्रम दूर किया जा सकेगा।

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