नई दिल्ली: देश में अगली पीढ़ी के हरित पटाखों के व्यावसायिक उत्पादन की अनुमति देने पर कोई एकमत नहीं है, दो सरकारी संगठन सुप्रीम कोर्ट में विरोधाभासी रुख अपना रहे हैं।वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद – राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान (CSIR-NEERI) ने नए फॉर्मूलेशन को मंजूरी दे दी है, जिसमें कहा गया है कि वे प्रदूषण के स्तर को 40-60% तक कम करते हैं। इसके विपरीत, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने आपत्ति जताते हुए तर्क दिया है कि इन पटाखों में अभी भी बेरियम नाइट्रेट – एससी द्वारा प्रतिबंधित रसायन – है और इसलिए, इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती है।केंद्र ने सीएसआईआर-एनईईआरआई को आतिशबाजी निर्माताओं के साथ मिलकर 50% से अधिक प्रदूषण कम करने वाली हरित/कम उत्सर्जन वाली आतिशबाजी विकसित करने के लिए कहा था।
सीजेपी जंतर मंतर विरोध अपडेट
इसके बाद, तमिलनाडु फायरवर्क्स एंड एमोर्सेस मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (TANFAMA) ने 50% से अधिक कण उत्सर्जन में कमी के लिए अन्य ऑक्सीडाइज़र के साथ संयोजन में बेरियम लवण/नाइट्रेट की कम मात्रा के साथ नई पीढ़ी के आतिशबाजी फॉर्मूलेशन तैयार किए।सीएसआईआर-एनईईआरआई रिपोर्ट के अनुसार, पीएम10 और पीएम2.5 के लिए उत्सर्जन में कमी 45% से 60% के बीच थी, और सिफारिश की गई कि प्रकाश-उत्सर्जक आतिशबाजी के लिए इन फॉर्मूलेशन, जैसे कि फूल के गमले, फुलझड़ियाँ, चक्कर, पेंसिल और टिमटिमाते सितारे और उनके संकर, को व्यावसायिक उत्पादन के लिए माना जा सकता है। इसने जुड़े हुए पटाखों के निर्माण को भी मंजूरी दे दी, जिन्हें ‘लडीज़’ के नाम से जाना जाता है, जिन्हें अदालत के आदेश के अनुसार प्रतिबंधित कर दिया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) उत्सर्जन में लगभग 30% की कमी आई है और संयुक्त पटाखों के लिए ठोस अपशिष्ट उत्पादन में 32% तक की कमी आई है।सीएसआईआर-एनईईआरआई रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए, सीपीसीबी ने इस बात पर आपत्ति जताई कि पटाखों में बेरियम नाइट्रेट का उपयोग कैसे किया जा सकता है क्योंकि इसे शीर्ष अदालत ने प्रतिबंधित कर दिया है और उनके उत्पादन की अनुमति देना अदालत के आदेश का उल्लंघन होगा। बोर्ड ने कहा, “इस अदालत ने 23 अक्टूबर, 2018 के आदेश के जरिए पटाखों में बेरियम साल्ट के इस्तेमाल पर स्पष्ट रूप से प्रतिबंध लगा दिया है और इसलिए, कम मात्रा में भी बेरियम यौगिकों को शामिल करने वाला कोई भी फॉर्मूलेशन उक्त आदेश का उल्लंघन है।”इसमें आगे कहा गया, “पीएम 10 और पीएम 2.5 के स्तर में आई कमी का तुलनात्मक मूल्यांकन (i) बेहतर कम उत्सर्जन वाले पटाखों और (ii) पूरी तरह से बेरियम के बिना तैयार किए गए हरित पटाखों के साथ नहीं किया गया है, जिससे दावा अधूरा और अनिर्णायक है।”दो विशेषज्ञ निकायों के विरोधाभासी रुख के बीच फंसे पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने एक हलफनामा दायर कर इसे शीर्ष अदालत के संज्ञान में लाया और इस मुद्दे पर निर्णय लेने के लिए इसे सुप्रीम कोर्ट पर छोड़ दिया। इसने अदालत को यह भी बताया कि नई पीढ़ी के पटाखों की संरचना पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पीईएसओ) को भेजी गई थी, जो विस्फोटक पदार्थों के लिए नियामक संस्था है, और उसने पटाखों के नए फॉर्मूलेशन के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र दिया था।

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