प्रयागराज: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने लोकसभा सांसद चन्द्रशेखर आजाद के खिलाफ सोशल मीडिया पर जातिसूचक टिप्पणी पोस्ट करने के आरोपी एक व्यक्ति को आरोप मुक्त करने से इनकार कर दिया है।अदालत ने कहा कि, आरोप तय करने के चरण में, केवल यह जांचना आवश्यक है कि क्या प्रथम दृष्टया मामला मौजूद है, न कि लघु सुनवाई आयोजित करना।इन टिप्पणियों के साथ, न्यायमूर्ति संतोष राय ने चंद्र प्रकाश सिंह उर्फ गोली ठाकुर द्वारा दायर एक आपराधिक अपील को खारिज कर दिया, जिन्होंने उनके आरोपमुक्ति आवेदन को खारिज करने वाले ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी।मामला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 352 (जानबूझकर अपमान), सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 और एससी/एसटी अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत हमीरपुर जिले के सुमेरपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था।अपीलकर्ता ने तर्क दिया कि प्राथमिकी लगभग सात दिनों की देरी के बाद दर्ज की गई थी और सोशल मीडिया पोस्ट में किसी विशेष जातिसूचक शब्द का उल्लेख नहीं किया गया था। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि आरोप अस्पष्ट थे।अपील का विरोध करते हुए, राज्य सरकार ने कहा कि अपीलकर्ता को विशेष रूप से एफआईआर में नामित किया गया था और जांच ने कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों वाले सोशल मीडिया पोस्ट सहित पर्याप्त प्रथम दृष्टया सामग्री एकत्र की थी।अदालत ने कहा कि हालांकि एफआईआर में कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए विशिष्ट जातिवादी शब्दों को दोबारा नहीं दर्शाया गया है, लेकिन इसमें कहा गया है कि नगीना सांसद के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की गई थी।अदालत ने आगे कहा कि अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयानों में विशेष रूप से इस्तेमाल किए गए अपमानजनक शब्दों का जिक्र है।अपने 21 जुलाई के आदेश में, अदालत ने कहा कि सामग्री की प्रथम दृष्टया जांच से संकेत मिलता है कि चुनौती के तहत टिप्पणियाँ कथित तौर पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से संबंधित एक विशेष समुदाय के खिलाफ निर्देशित की गई थीं।

News Now Network deliver fast, accurate local news coverage, daily sports updates, and official press releases. Admin